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Blog Bhakti Sadhna

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पूजा या दर्शन करते समय दूर रहना चाहिए इन 5 लोगों से

कई लोग ऐसे होते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और कई लोग अपने कर्मों और अपनी आदतों से नकारात्मक ऊर्जा देते हैं। कहा जाता है, मंदिर जाते समय या भगवान के दर्शन बिल्कुल शांत मन से करना चाहिए। विचलित मन से की गई पूजा का फल नहीं मिलता है। इसलिए, धर्म ग्रंथों में श्रीरामकृष्ण परमहंस ने ऐसे 5 लोगों के बारे में बताया हैं, जो नकारात्मक ऊर्जो देने वाले होते हैं और ऐसे लोगों से देव पूजा या आराधना के समय दूर ही रहना चाहिए।

2016-07-04 05:55:41

जानिए गीले कपड़ों में क्यों करनी चाह‌िए धार्मिक स्थलों की पर‌िक्रमा

कभी आपने सोचा है कि प्राचीन मंदिरों में कुंआ या कोई जलाशय क्यों होता है? कभी इस बात पर विचार किया है कि हम परिक्रमा क्यों लगाते हैं और यह परिक्रमा एक खास दिशा में ही क्यों होती है? इन सबके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं।

2016-07-04 05:52:10

Pitra Dosh Nivaran Ke Upay : पितृ दोष निवारण के उपाय

हिंदू धर्म में श्राद्ध की व्यवस्था इसलिए की गई है कि मनुष्य साल में एक बार अपने पितरों को याद कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सके। श्राद्ध का अर्थ अपने पितरों से प्रति व्यक्त की गई श्रद्धा से है। जिस व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष होता है, उसके लिए भी श्राद्ध पक्ष का समय विशेष होता है क्योंकि इन 16 दिनों में किए गए कर्मों के आधार पर ही पितृ दोष से मुक्ति मिलना संभव है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो लोग श्राद्ध पक्ष के दौरान अपने पितरों का तर्पण, पिण्डदान व श्राद्ध नहीं करते, उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

2016-07-04 05:47:55

जानिए सबसे पहले किसने किया था श्राद्ध, कैसे शुरू हुई ये परंपरा?

श्राद्ध के बारे में अनेक धर्म ग्रंथों में कई बातें बताई गई हैं। महाभारत के अनुशासन पर्व में भी भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के संबंध में कई ऐसी बातें बताई हैं, जो वर्तमान समय में बहुत कम लोग जानते हैं। महाभारत में ये भी बताया गया है कि श्राद्ध की परंपरा कैसे शुरू हुई और फिर कैसे ये धीरे-धीरे जनमानस तक पहुंची। आज हम आपको श्राद्ध से संबंधित कुछ ऐसी ही रोचक बातें बता रहे हैं-

2016-07-04 05:41:21

भगवान के जप में भूलकर भी न करें ये 5 काम

जप करना देवी-देवताओं को प्रसन्न करने का और उनकी कृपा पाने का एक आसान तरीका होता है। जप करते समय पूरे विधि-विधान का ध्यान रखना जरूरी होता है। पूरी क्रिया और श्रद्धा के साथ किया गया जप शुभ फल देना वाला होता है। पुराणों में जप से संबंधित कई बातें बताई गई हैं, जिनका ध्यान हर किसी को रखना ही चाहिए।

2016-07-04 05:30:37

पूजा में परिक्रमा- क्यों करें, कैसे करें, कितनी करें?

पूजा करते समय देवी-देवताओं की परिक्रमा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है भगवान की परिक्रमा से अक्षय पुण्य मिलता है और पाप नष्ट होते हैं। इस परंपरा के पीछे धार्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। जिन मंदिरों में पूरे विधि-विधान के साथ देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित की जाती है, वहां मूर्ति के आसपास दिव्य शक्ति हमेशा सक्रिय रहती है। मूर्ति की परिक्रमा करने से उस शक्ति से हमें भी ऊर्जा मिलती है। इस ऊर्जा से मन शांत होता है। जिस दिशा में घड़ी की सुई घुमती है, उसी दिशा में परिक्रमा करनी चाहिए, क्योंकि दैवीय ऊर्जा का प्रवाह भी इसीप्रकार रहता है। किस भगवान की कितनी परिक्रमा करना चाहिए 1. श्रीकृष्ण की 3 परिक्रमा करनी चाहिए। 2. देवी की 1 परिक्रमा करनी चाहिए। 3. भगवान विष्णुजी एवं उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए। 4. श्रीगणेशजी और हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है। 5. शिवजी की आधी परिक्रमा करनी चाहिए, क्योंकि शिवजी के अभिषेक की धारा को लाघंना अशुभ माना जाता है। परिक्रमा करते समय ध्यान रखनी चाहिए ये बातें 1. जिस देवी-देवता की परिक्रमा की जा रही है, उनके मंत्रों का जप करना चाहिए। 2. भगवान की परिक्रमा करते समय मन में बुराई, क्रोध, तनाव जैसे भाव नहीं होना चाहिए। 3. परिक्रमा नंगे पैर ही करना चाहिए। 4. परिक्रमा करते समय बातें

2016-07-04 05:06:34

भगवान शिव को ही लिंग रूप में क्यों पूजा जाता है ?

शिव ब्रह्मरूप होने के कारण निष्कल अर्थात निराकार हैं । उनका न कोई स्वरूप है और न ही आकार वे निराकार हैं । आदि और अंत न होने से लिंग को शिव का निराकार रूप माना जाता है । जबकि उनके साकार रूप में उन्हे भगवान शंकर मानकर पूजा जाता है । केवल शिव ही निराकार लिंग के रूप में पूजे जाते हैं । लिंग रूप में समस्त ब्रह्मांड का पूजन हो जाता है क्योंकि वे ही समस्त जगत के मूल कारण माने गए हैं । इसलिए शिव मूर्ति और लिंग दोनों रूपों में पूजे जाते हैं । यह संपूर्ण सृष्टि बिंदु-नाद स्वरूप है । बिंदु शक्ति है और नाद शिव । यही सबका आधार है । बिंदु एवं नाद अर्थात शक्ति और शिव का संयुक्त रूप ही तो शिवलिंग में अवस्थित है । बिंदु अर्थात ऊर्जा और नाद अर्थात ध्वनि । यही दो संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है ।’शिव’ का अर्थ है – ‘परम कल्याणकारी’ और ‘लिंग’ का अर्थ है – ‘सृजन’ । शिव के वास्तविक स्वरूप से अवगत होकर जाग्रत शिवलिंग का अर्थ होता है प्रमाण । वेदों और वेदान्त में लिंग शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए आता है । यह सूक्ष्म शरीर 17 तत्वों से बना होता है । मन ,बुद्धि ,पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां व पांच वायु । आमतौर पर शिवलिंग को गलत अर्थों में लिया जाता है, जो कि अनुचित है या उचित यह हम नहीं जानते । वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन:

2016-07-04 04:57:58

पूजन में ये 8 चीजें सीधे जमीन पर नहीं रखनी चाहिए

1. दीपक, 2. शिवलिंग, 3. शालग्राम (शालिग्राम), 4. मणि, 5. देवी-देवताओं की मूर्तियां, 6. यज्ञोपवीत (जनेऊ), 7. सोना और 8. शंख, इन 8 चीजों को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इन्हें नीचे रखने से पहले कोई कपड़ा बिछाएं या किसी ऊंचे स्थान पर रखें। इन तिथियों पर ध्यान रखें ये बातें हिन्दी पंचांग के अनुसार किसी भी माह की अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि पर स्त्री संग, तेल मालिश और मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए। सुबह उठते ही ध्यान रखें ये बातें स्त्री हो या पुरुष, सुबह उठते ही इष्टदेव का ध्यान करते हुए दोनों हथेलियों को देखना चाहिए। इसके बाद अधिक समय तक बिना नहाए नहीं रहना चाहिए। रात में पहने हुए कपड़ों को शीघ्र त्याग देना चाहिए। इनका अनादर नहीं करना चाहिए हमें किसी भी परिस्थिति में पिता, माता, पुत्र, पुत्री, पतिव्रता पत्नी, श्रेष्ठ पति, गुरु, अनाथ स्त्री, बहन, भाई, देवी-देवता और ज्ञानी लोगों का अनादर नहीं करना चाहिए। इनका अनादर करने पर यदि व्यक्ति धनकुबेर भी हो तो उसका खजाना खाली हो जाता है। इन लोगों का अपमान करने वाले व्यक्ति को महालक्ष्मी हमेशा के लिए त्याग देती हैं। रविवार को ध्यान रखें ये बातें रविवार के दिन कांस्य के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए। इस दिन मसूर की दाल, अदरक, लाल रंग की खाने की चीजें भी नहीं खाना चाहिए। तय तिथि पर पूरा करना

2016-07-04 04:57:20

Shirdi Sai Baba Chamatkar: Don’t Ignore It! It WORKS!

Couple of minutes back, I got a mail from an obscure email address. It contained only the accompanying picture. I opened it for some time and it said – post it on your web journal. Beneath the photograph, it said, any individual who shares this photograph will get a shock blessing inside 15 minutes. I sent it to at 5 companions from my contact list and held up.

2016-07-02 02:51:59

रक्षाबंधन विशेष : भाई-बहन का मनोविज्ञान| Raksha Bandhan vishesh : Bhai Behan ka Manovigyan

यहां परिवार (Family) और परवरिश दोनों की अहम भूमिका होती है। घर के बड़े हंसी-मजाक में भी कभी बच्चे को यह अहसास ना कराएं कि नए बच्चे के आगमन से उसकी अहमियत कम हो जाएगी। इस उम्र में बैठा उनका यह डर ग्रंथि बनकर रिश्तों की डोर कमजोर कर सकता है। भाई और बहन के बीच स्वस्थ रिश्ते (Healthy Relations) की बुनियाद रखने की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है।

2016-06-29 09:13:41