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Blog Bhakti Sadhna

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Is Lord Hanuman Ji still alive? Some live facts about Hanumaan Ji

Hindu’s deity, Lord Hanuman has been considered as an ideal of force, power, energy, wisdom, service and devotion by the people following Hindu religion. Claimed to be one of the oldest religions on this earth, Hinduism has been being one of the most scientific of all.

2016-06-28 01:50:07

देश की रक्षा करते हैं ये 732 वीर हनुमान मंदिर

देश और धर्म की रक्षा के लिए हनुमानजी और मां दुर्गा का आह्‍वान किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने जब महाभारत युद्ध की घोषणा की थी तब उन्होंने पांडवों से इन्हीं दोनों देवताओं को प्रसन्न करने के लिए कहा था। दोनों ही देवताओं ने प्रकट होकर विजय दिलाने के वचन भी दिया था। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं हनुमानजी के ऐसे मंदिरों के बारे में जहां जाकर आप जीवन के हर क्षेत्र में विजय हो सकते हैं।

2016-06-28 00:36:42

जानें बिल्व पत्र के बारे में रहस्यमय बातें और बनें मालामाल | Jaane Bilva Patra ke baare mein rahasyamaya baatein aur bane maalamaal

बिल्व तथा श्रीफल नाम से प्रसिद्ध (famous) यह फल बहुत ही काम का है। यह जिस पेड़ (tree) पर लगता है वह शिवद्रुम भी कहलाता है। बिल्व का पेड़ संपन्नता का प्रतीक, बहुत पवित्र तथा समृद्धि देने वाला है। बेल के पत्ते शंकर जी (shiv shanker ji) का आहार माने गए हैं, इसलिए भक्त लोग बड़ी श्रद्धा से इन्हें महादेव के ऊपर चढ़ाते हैं। शिव की पूजा के लिए बिल्व-पत्र बहुत ज़रूरी माना जाता है। शिव-भक्तों का विश्वास है कि पत्तों (leaves) के त्रिनेत्रस्वरूप् तीनों पर्णक शिव के तीनों नेत्रों को विशेष प्रिय हैं।

2016-06-24 23:31:09

एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं..? वैज्ञानिक कारण हैं..! Ek Gotra mein shaadi kyon nahi ? vaigyanik kaaran hai.

एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं..? वैज्ञानिक कारण हैं..! Ek Gotra mein shaadi kyon nahi ? vaigyanik kaaran hai. एक दिन डिस्कवरी (Discovery) पर जेनेटिक बीमारियों (Genetic problems) से सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देख रहा था … उस प्रोग्राम में एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा की जेनेटिक बीमारी न हो इसका एक ही इलाज है और वो है “सेपरेशन ऑफ़ ...

2016-06-23 06:20:49

किस देवी देवता को कौन से फूल ज्यादा प्रिये हैं

हिंदू धर्म (hindu religion) में विभिन्न धार्मिक कर्म-कांडों में फूलों का विशेष महत्व है। देव पूजा विधियों में कई तरह के फूल-पत्तों को चढ़ाना बड़ी ही शुभ माना गया है। धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, आरती आदि कार्य बिना पुष्प (flower) के अधूरे ही माने जाते हैं। कुछ विशेष फूल देवताओं को चढ़ाना निषेध होता है। किंतु शास्त्रों में ऐसे भी फूल बताए गए हैं, जिनको चढ़ाने से हर देवशक्ति की कृपा मिलती है यह बहुत शुभ, देवताओं को विशेष प्रिय होते हैं और हर तरह का सुख-सौभाग्य बरसाते हैं। कौन से भगवान की पूजा किस फूल से करें, इसके बारे में यहां संक्षिप्त जानकारी (complete detail) दी जा रही है। इन फूलों को चढ़ाने से आपकी हर मनोकामना शीघ्र ही पूरी हो जाती है-

2016-06-23 06:02:41

25,000 बुजुर्गों को फ्री तीर्थ यात्रा | Government would soon provide free religious tour IRCTC

राजस्थान सरकार इस साल 25 हजार बुजुर्गों को फ्री तीर्थयात्रा कराएगी. इस संबंध में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना के तहत देवस्थान विभाग और रेल मंत्रालय के उपक्रम आई.आर.सी.टी.सी. के बीच समझौता पत्र (एम.ओ.यू) पर हस्ताक्षर हुए.

2016-06-22 01:56:56

The greatest gift- I ever had came from God come from God - I call him DAD

Anyone can be a father, but it takes someone special to be a dad, and that's why I call you dad, because you are so special to me. You taught me the game and you taught me how to play it right.

2016-06-19 04:25:04

वैज्ञानिक हैरान हैं और मंदिर इतना महान है ! आज तक कोई इसकी पुष्टि नहीं कर पाया !

उत्तर प्रदेश के महानगर कानपुर में स्थित इक मंदिर का चमत्कार है जो विज्ञानिक गणना से भी ज्यादा अचूक है आजतक कभी फेल नहीं हुआ हमेशा सही समय और आंकड़े देता है, आखिर कैसे ५००० साल पहले बने इस मंदिर ने इतनी सही गणना कैसे शुरू की ?

2016-06-19 03:31:32

कलयुग में कैसे हनुमान जी के पांच रूप होंगे जो भक्तों का कल्याण करेंगे

क्या आज भी हनुमान जी अपने भक्तों के कल्याण के लिए विभिन्न रूपों में प्रेकत होते हैं ! जानिए कलयुग में कौन सा रूप पर्मुख हैं

2016-06-18 09:48:02

अर्धनारीश्वर शिवलिंग ग्रीष्म ऋतु में दो भागों में बंट जाता है और शीत ऋतु में पुन: एक रूप धारण कर ले

जानिए क्यों दो विभिन्न रूप - ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तित होने के अनुसार इनके दोनों भागों के मध्य का अंतर घटता-बढ़ता रहता है। ग्रीष्म ऋतु में क्यों यह स्वरूप दो भागों में बंट जाता है और शीत ऋतु में पुन: एक रूप धारण कर लेता है।

2016-06-13 09:58:19