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आखिर खाटू श्याम जी हैं कौन, जानिए

आखिर खाटू श्याम जी हैं कौन, जानिए

इसकी सबपूर्ण कहानी बताते है जब द्वापर युग मतलब महाभारत के वक्त वीर घटोत्कच और मोर्वी को एक पुत्र रत्न प्राप्त हुआ था! जिसके बाल बाबर शेर की तरह होने के कारण उसका नाम बर्बरीक रख गया था| आज बर्बरीक को वर्तमान में खाटू के श्याम, कलयुग के अवतार, श्याम सरकार, तीन बाणधारी, खाटू नरेश एवं अन्य अगणित नामो से इन्हे जानते और पुकारे जाते है!

 

माँ की आज्ञा प्राप्त कर बर्बरीक युद्ध में अर्जुन का साथ देने जा रहे थे और माँ ने उन्हें तीन बाण दिए थे और कहा की तुमे उसकी ही तरफ से युद्ध करोगे जो हार रहा होगा! ये सब कृष्ण ने जान लिया और उन्होंने ब्राह्मण के रूप में उनकी परीक्षा ली उसमे पूछा की तुम्हे तीन बाण प्राप्त हुए है और तुम अर्जुन की तरह से लड़ोगे तो कौरव ख़त्म हो जायेगा और फिर वचन अनुसार कौरव की तरह से लड़ोगे तो ये ख़त्म हो जाओगे| यहाँ कुरुक्षेत्र में तुम अकेले बचोगे!

 

इस पर बर्बरीक ने उपाय पूछा में फिर क्या करू में कृष्ण ने उनका सिर मांग लिया और और उन्होंने दे दिया! तब  महान वीर बलिदान से प्रसन्न होकर वरदान दिया था श्री कृष्ण ने की कलियुग में तुम्हे मेरे श्याम के नाम से जाने जाओगे, क्योकि कलयुग में हारे गए का साथ देने वाला एक ही श्याम नाम धारण करने वाला समर्थ है| और खाटू नगर तुम्हारा धाम बनेगा और तुम्हरे शीश को खाटू नगर में दफनाया जायेगा| तथा तुम्हरी माँ के वचन अनुसार जो भक्त हार गया उसका तुम हारे का सहारा बनोगे! और आज खाटू नगर सीकर जिले में आता है जहाँ होली या फागुन में मेला लगता है!

 

बता दे खाटू धाम इस तरह बना! जब खाटू गांव की स्थापना राजा खट्टवांग ने की थी। खट्टवां ने ही बभ्रुवाहन के बर्बरीकद्ध के देवरे में बर्बरीक के सिर की प्राण प्रतिष्ठा करवाई थी। खाटू की स्थापना के विषय में अन्य कई मत भी प्रचलित है। कई विद्वान ने इसे महाभारत के पहले का मानते हैं तो कई इसे ईसा पूर्व के वक्त का मानते है।

 

यह मंदिर वर्तमान में भी मौजूद है जहां बर्बरीक के सिर को दफनाया गया था। और सफेद संगमरमर से बनाया गया खाटू श्यामजी मंदिर बनावाया गया था। खाटू श्याम जी का मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर ज़िले के गांव खाटू में बना हुआ है।

खाटू श्याम मंदिर जयपुर से उत्तर दिशा में वाया रींगस होकर 80 किलोमीटर की दुरी पर पड़ता है। इस श्याम मंदिर की आधारशिला सन् 1720 में रखी गई थी।

 

यहाँ तक की इतिहासकारों के मुताबित  सन् 1679 में औरंगजेब की सेना ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। इस मंदिर की रक्षा के लिए उस वक्त कई राजपूतों ने अपना प्राणोत्सर्ग किया था। खाटू के श्याम मंदिर में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की पूजा खाटूश्याम के रूप में की जाती है।

प्रत्येक वर्ष खाटू श्यामजी मंदिर में फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष में बड़े मेले का आयोजन होता है। और हर वर्ष इस मेले में हजारो संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। यह मेला फागुन सुदी दशमी को आरंभ और द्वादशी के अंत में लगता है।

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